कुरुक्षेत्र, 10 अक्टूबर : श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के काय चिकित्सा विभाग ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में वैद्य बलबीर सिंह संधु और मनोचिकित्सक डॉ. अभिलव कंबोज ने मानसिक रोगों की बढ़ती चुनौती और उनके आयुर्वेदिक समाधान पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता वैद्य संधु ने कहा, “मानसिक असंतुलन ही शारीरिक बीमारियों की मुख्य जड़ है।” उन्होंने बताया कि भारत की 13.5% आबादी मानसिक रोगों से प्रभावित है, और यह आत्महत्या जैसे गंभीर परिणामों से जुड़ी है। उन्होंने महाभारत के अर्जुन प्रसंग को अवसाद का उदाहरण बताते हुए आयुर्वेद में सत्त्वावजय, औषध चिकित्सा और साइकोथेरेपी जैसे उपायों की चर्चा की।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में डॉ. अभिलव कंबोज ने मानसिक रोगों की प्राथमिक चिकित्सा के पांच कदम बताए: जोखिम का आकलन, बिना आलोचना के सुनना, भरोसा देना, विशेषज्ञ की मदद के लिए प्रेरित करना, और आत्म-सहायता विधियों को अपनाना। उन्होंने कहा, “मानसिक रोगी के साथ संवाद, सहयोग और सहानुभूति सबसे प्रभावी उपचार हैं।”
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान के मार्गदर्शन में आयोजन हुआ। अतिथियों का स्वागत प्रो. आशीष मेहता और प्रो. नीलम ने किया। कार्यक्रम में कई वरिष्ठ प्रोफेसर और चिकित्सक भी उपस्थित रहे।




