हांसी | हरियाणा
हांसी के कापड़ो गांव निवासी 29 वर्षीय हवलदार दीपक गोयत का सोमवार को दिल्ली स्थित आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल (आरआर) में निधन हो गया। वे 21 ग्रेनेडियर्स बटालियन में तैनात थे और बीते लगभग एक साल से ब्लड कैंसर से पीड़ित थे। गंभीर बीमारी के बावजूद उन्होंने अंत तक धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा बनाए रखी।
पैतृक गांव में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
मंगलवार को जब सेना के वाहन से हवलदार दीपक गोयत का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव कापड़ो पहुंचा, तो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। गांव के मुख्य मार्ग से लेकर उनके निवास तक लंबा वाहन काफिला नजर आया। ग्रामीणों ने देशभक्ति के नारों के साथ वीर सपूत को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
परिजनों का दर्द, गांव को बेटे पर गर्व
पार्थिव शरीर के घर पहुंचते ही परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। माता-पिता और पत्नी गहरे सदमे में दिखाई दिए। दीपक अपने माता-पिता के एकमात्र पुत्र थे। उनके पिता बलवान सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। परिवार में उनकी पत्नी और तीन वर्षीय जुड़वा बेटियां हैं, जो अब अपने पिता के साए से वंचित हो गई हैं।
खेल कोटे से सेना तक का सफर
दीपक गोयत वर्ष 2016 में कुश्ती खेल के माध्यम से स्पोर्ट्स कोटे के तहत भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। खेलों में मिली अनुशासन और मेहनत की सीख ने उन्हें सेना में एक समर्पित सैनिक बनाया। सेवा के दौरान उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के गुलगुलपुर क्षेत्र में रही।
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम संस्कार
हवलदार दीपक गोयत की अंतिम यात्रा पूरे सैन्य सम्मान के साथ निकाली गई। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को श्मशान घाट ले जाया गया, जहां सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
स्मृतियों में जीवित रहेगा बलिदान
कापड़ो गांव का यह जांबाज सपूत आज भले ही हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसका साहस, समर्पण और देश के प्रति निष्ठा आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।




