इंसाइट न्यूज 24, कुरुक्षेत्र, 9 सितंबर : श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में चल रहे साप्ताहिक सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम के दूसरे दिन मंगलवार को ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA), दिल्ली के प्रोफेसर वैद्य रमाकांत यादव ने किडनी और मूत्र संबंधी रोगों पर गहन चर्चा की। उन्होंने कहा कि गलत खानपान और तनावपूर्ण जीवनशैली के कारण इन रोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
कार्यक्रम के पहले सत्र में प्रो. यादव ने बताया कि पेशाब में रुकावट, जलन और संक्रमण जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। आयुर्वेद में इन्हें मूत्रकृच्छ, मूत्राघात और मूत्रौकसाद जैसे नामों से पहचाना जाता है।
आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियां
प्रो. यादव ने बताया कि आयुर्वेद में इन रोगों के लिए कई प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं:
• पुनर्नवाआदिक्षीरबस्ती: किडनी को शुद्ध और सक्रिय करने की विधि
• क्वाथ (हर्बल काढ़ा): शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने के लिए
• स्नेह विरेचन: पाचन और मूत्र मार्ग को संतुलित करने हेतु
• श्यामादिगोमूत्रसिद्धनीरूबस्ती: संक्रमण और रुकावट को कम करने में सहायक
इम्यूनिटी बढ़ाने पर भी जोर
दूसरे सत्र में प्रो. यादव ने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जन्म से ही सहज बल मौजूद होता है, जिसे ऋतु, आहार, व्यायाम और रसायन चिकित्सा से युक्तिकृत बल में बदला जा सकता है।
आंवला, मिश्री या शहद के साथ लेने पर, इम्यूनिटी को दोगुना करने में मदद करता है।
कार्यक्रम में काय चिकित्सा विभाग की चेयरपर्सन प्रो. नीलम रानी, एसोसिएट प्रो. नेहा लांबा और डॉ. प्रीति गहलावत समेत कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे।




