वॉशिंगटन: अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में तैनात अपने विमानवाहक पोत स्ट्राइक ग्रुप यूएसएस अब्राहम लिंकन को मध्य पूर्व की ओर भेजने का फैसला किया है। कई रक्षा सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह कदम ईरान के साथ बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता के मद्देनज़र उठाया गया है।
रक्षा अधिकारियों के अनुसार, विमानवाहक पोत के साथ कई युद्धपोत और कम से कम एक पनडुब्बी भी शामिल है। यह स्ट्राइक ग्रुप लगभग एक सप्ताह में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कार्यक्षेत्र—जिसमें खाड़ी क्षेत्र और आसपास के समुद्री इलाके शामिल हैं—तक पहुंच सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि इस तैनाती का उद्देश्य क्षेत्र में प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना और मजबूत नौसैनिक उपस्थिति सुनिश्चित करना है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अमेरिका हालात बिगड़ने की स्थिति में अपनी सैन्य तैयारी को और मजबूत करने के लिए तैयार है। हालांकि पेंटागन ने अभी तक विमानवाहक पोत के गंतव्य और समय-सीमा की औपचारिक पुष्टि नहीं की है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की सैन्य तैनाती आमतौर पर कूटनीतिक और सुरक्षा हालात पर नजर रखते हुए प्रतिरोध और सतर्कता दोनों के उद्देश्य से की जाती है।




