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पवित्र ग्रंथ गीता हर परिस्थिति में मुस्कुराते रहने की सीख देती है : स्वामी ज्ञानानंद

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कुरुक्षेत्र, 5 जनवरी।
गीता ज्ञान संस्थानम में आयोजित पांच दिवसीय गीता चिंतन शिविर के दौरान गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता जीवन की हर परिस्थिति में मुस्कुराते रहने की कला सिखाती है। उन्होंने कहा कि गीता में किसी को कष्ट न देने और क्षमा को सामर्थ्यवान व्यक्ति का गुण बताया गया है। इस शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 200 से अधिक प्रतिनिधि सहभागिता कर रहे हैं।

अपने प्रवचन में स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि गीता मन को स्थिर करने का मार्ग दिखाती है। महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब अर्जुन का मन विचलित हुआ तो भगवान श्रीकृष्ण के गीता उपदेश से उसका मन स्थिर हो गया और वह अपने कर्तव्य के लिए तैयार हुआ। गीता का संदेश है कि स्वस्थ मन ही स्वस्थ शरीर का आधार होता है।

वैराग्य की व्याख्या करते हुए गीता मनीषी ने कहा कि वैराग्य का अर्थ सब कुछ छोड़ देना नहीं, बल्कि उस आसक्ति को त्यागना है जो लक्ष्य में बाधा बने। उन्होंने बताया कि अहंकार जीवन की सबसे बड़ी बाधा है और अहंकार के त्याग का नाम ही वैराग्य है। गीता यह सिखाती है कि सभी से प्रेम रखें, लेकिन आसक्ति न रखें, क्योंकि आसक्ति ही तनाव का कारण बनती है।

स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि गीता भक्ति, कर्म और नाम सिमरण का दिव्य संदेश देती है। कलियुग में नाम सिमरण को सबसे बड़ा आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि श्रद्धा के साथ किया गया नाम सिमरण स्वयं साधना बन जाता है। भक्ति के वास्तविक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने सभी कर्म ईश्वर को अर्पित भाव से करता है, तभी मन और बुद्धि परमात्मा में स्थिर होती है। यज्ञ, दान और तप का उद्देश्य केवल बाह्य कर्म नहीं, बल्कि अंतःकरण की शुद्धि है। इच्छाओं और विकारों के त्याग से ही जीवन में स्थायी शांति प्राप्त होती है।

इस अवसर पर गीता जयंती महोत्सव के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले बाल संस्कार कुरुक्षेत्र के बच्चों को स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

वृंदावन में बांसुरी की तान, कुरुक्षेत्र में गीता का दिव्य ज्ञान : स्वामी ज्ञानानंद

कुरुक्षेत्र, 5 जनवरी।
गीता ज्ञान संस्थान स्थित श्री कृपा बिहारी मंदिर में आयोजित खिचड़ी उत्सव के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पूरा वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर रहा। इस दौरान झूला उत्सव, दर्पण झांकी, गोपेश्वर महादेव, श्रीराम-शबरी सहित अनेक दिव्य झांकियों का मनोहारी प्रदर्शन किया गया, जिसे देखने के लिए श्रद्धालु देर तक जमे रहे।

स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन देते हुए कहा कि जहां वृंदावन में बांसुरी की तान गूंजती है, वहीं कुरुक्षेत्र में गीता का दिव्य ज्ञान प्रवाहित होता है। दोनों ही भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उपदेशों के माध्यम से भक्त को परम तत्व से जोड़ते हैं। उन्होंने खिचड़ी उत्सव की परंपरा पर भी प्रकाश डाला।

ब्रह्मसरोवर की मासिक परिक्रमा में उमड़ा जनसैलाब
गीता मनीषी के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने ब्रह्मसरोवर की मासिक परिक्रमा की। राधा-कृष्ण भाव के भजनों से वातावरण भक्तिमय हो गया और ठाकुर जी की आरती उतारी गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस परिक्रमा में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।

6 व 7 जनवरी को ध्यान साधना का आयोजन
श्रीकृष्ण कृपा जीओ गीता समिति के प्रधान प्राचार्य डॉ. ऋषिपाल ने बताया कि गीता मनीषी के सान्निध्य में 6 और 7 जनवरी को प्रातः 6:30 से 7:30 बजे तक ध्यान साधना का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से समय पर पहुंचकर ध्यान साधना में सहभागिता करने की अपील की।

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