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धान घोटाले के विरोध में भाकियू चढ़ूनी का कुरुक्षेत्र में प्रदर्शन, सरकार को 23 मार्च तक की चेतावनी

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कुरुक्षेत्र।
प्रदेश में कथित धान घोटाले को लेकर भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने कुरुक्षेत्र के लघु सचिवालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इससे पहले भाकियू की जाट धर्मशाला में संगठन की बैठक आयोजित की गई, जहां से किसान रोष मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और एडीसी विवेक आर्य को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।

भाकियू ने धान घोटाले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने की मांग करते हुए सरकार को 23 मार्च तक का अल्टीमेटम दिया।

5 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का दावा

भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने आरोप लगाया कि हरियाणा में करीब 5 हजार करोड़ रुपये का धान घोटाला हुआ है। उन्होंने कहा कि इस घोटाले से जुड़े पुख्ता सबूत प्रशासन को पहले ही सौंपे जा चुके हैं, इसके बावजूद न तो सरकार और न ही प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया है। उनका कहना है कि पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

फर्जीवाड़े के बावजूद कार्रवाई नहीं

चढ़ूनी ने कहा कि धान घोटाले में फर्जी बिल, गेट पास और यहां तक कि फर्जी वाहनों का इस्तेमाल किया गया। करनाल में इस मामले में कुछ अधिकारियों पर एफआईआर भी दर्ज हुई, लेकिन सरकार उन्हें बचाने में लगी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुरुक्षेत्र में भी घोटाले को लेकर शिकायत की गई, लेकिन यहां मामला दर्ज तक नहीं किया गया।

स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

भाकियू अध्यक्ष ने स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकारी और निजी अस्पतालों में दवाइयां मनमाने दामों पर बेची जा रही हैं। वहीं, निजी स्कूलों में फीस के नाम पर अभिभावकों का शोषण किया जा रहा है और छोटे बच्चों पर भी हजारों रुपये का आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।

बिजली और बीज निजीकरण का विरोध

चढ़ूनी ने कहा कि सरकार बिजली के निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ा रही है और फसलों के बीजों को निजी कंपनियों के हवाले किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने किसानों की कर्जमाफी की मांग भी दोहराई। इस पर एडीसी विवेक आर्य ने किसानों की मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने और जांच कराने का भरोसा दिलाया।

23 मार्च को होगा अगला ऐलान

भाकियू अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यदि 23 मार्च तक मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो शहीद भगत सिंह के शहीदी दिवस पर होने वाले कार्यक्रम में आगे की रणनीति तय की जाएगी और बड़ा निर्णय लिया जाएगा।

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