इंसाइट न्यूज 24: चीन ने तिब्बत क्षेत्र में एक विशाल जलविद्युत परियोजना की शुरुआत की है। यह बाँध ब्रह्मपुत्र नदी (यारलुंग त्सांगपो) पर बनाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके चलते भारत और बांग्लादेश जैसे निचले क्षेत्रों में जल प्रवाह पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि—
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सूखे के मौसम में नदी का प्रवाह 80-85% तक घट सकता है।
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असम और अरुणाचल प्रदेश में जल संकट और कृषि पर सीधा असर पड़ेगा।
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मानसून के समय बाँध से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी अचानक बाढ़ का खतरा भी पैदा कर सकता है।
भारत सरकार ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा है कि जल संसाधन केवल विकास का नहीं बल्कि सुरक्षा का भी सवाल है। वहीं, कूटनीतिक स्तर पर चीन से बातचीत की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं ताकि स्थिति और न बिगड़े।
स्थानीय पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि इस पर समय रहते ठोस नीति नहीं बनी, तो आने वाले वर्षों में भारत-चीन के बीच “जल संघर्ष” जैसी स्थिति खड़ी हो सकती है।




