कुरुक्षेत्र, 20 मार्च 2026। गुरुकुल ज्योतिसर में आयोजित ‘गुरुकुल शिक्षा उत्सव’ में बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक पहुंचे। 9वीं और 11वीं कक्षा में प्रवेश के लिए तीन हजार से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में गुरुकुल शिक्षा प्रणाली और उसकी विशेषताओं को विस्तार से बताया गया।
इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी संस्कारों और सही मार्गदर्शन के अभाव में पारंपरिक भारतीय मूल्यों से दूर होती जा रही है, जो समाज के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि गुरुकुल शिक्षा पद्धति विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास पर समान रूप से ध्यान देती है और उन्हें वैदिक संस्कारों से जोड़ती है।
उन्होंने यह भी कहा कि गुरुकुल का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। यहां छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ प्राकृतिक खेती, पशुपालन और अन्य व्यावहारिक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सक्षम बन सकें।
कार्यक्रम में वैदिक विद्वान डॉ. राजेन्द्र विद्यालंकार ने कहा कि गुरुकुल शिक्षा प्रणाली भारतीय संस्कृति और परंपराओं पर आधारित है, जो विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिक मूल्यों और मजबूत चरित्र का निर्माण करती है।
गुरुकुल के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. प्रवीण कुमार ने संस्थान की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि गुरुकुल के विद्यार्थियों ने एनडीए, आईआईटी, एनआईटी और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में बड़ी संख्या में छात्रों का चयन राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों में हुआ है।
20 से 22 मार्च तक चलेगा आयोजन
गुरुकुल शिक्षा उत्सव का आयोजन 20 से 22 मार्च तक किया जा रहा है। 21 मार्च को 7वीं और 8वीं कक्षा के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित होगी, जबकि 22 मार्च को 5वीं और 6वीं कक्षा के लिए परीक्षा ली जाएगी। सफल विद्यार्थियों की काउंसलिंग अगले दिन गुरुकुल कुरुक्षेत्र परिसर में की जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षक, अभिभावक और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे। पूरे आयोजन में उत्साह का माहौल देखने को मिला।




