Home » लेटेस्ट न्यूज़ » गीता हमें कठिनाइयों का सामना करने का मार्ग दिखाती है: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

गीता हमें कठिनाइयों का सामना करने का मार्ग दिखाती है: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

Picture of insightnews24

insightnews24

ज्योतिसर में विश्व मंगल महायज्ञ की पूर्णाहुति, मातृभूमि सेवा मिशन का आध्यात्मिक संकल्प—2027 तक प्रतिदिन होगा गीता ज्ञान यज्ञ

कुरुक्षेत्र, 02 दिसंबर 2025।
अंतरराष्ट्रीय श्रीमद्भगवद्गीता जयंती समारोह-2025 के उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा आयोजित अठारह दिवसीय विश्व मंगल महायज्ञ की पूर्णाहुति मंगलवार को गीता जन्मस्थली ज्योतिसर में वैदिक विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुई। पूर्णाहुति का संचालन गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज और मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने संयुक्त रूप से किया।

मुख्य अतिथि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस अवसर पर कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता एक वैश्विक ग्रंथ है, जो हमें जीवन की कठिनाइयों और दुविधाओं का सामना करने के लिए सही मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा कि गीता का सार्वभौमिक ज्ञान, आध्यात्मिक दिशा और नैतिक सिद्धांत मानव समाज को संतुलित, शांतिपूर्ण और कल्याणकारी जीवन की ओर प्रेरित करते हैं।
मुख्यमंत्री ने मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा किए जा रहे सामाजिक और आध्यात्मिक कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह अभियान गीता के संदेश को विश्व पटल पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

पूर्णाहुति कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि मातृभूमि सेवा मिशन श्रीमद्भगवद्गीता को समर्पित एक सामाजिक और आध्यात्मिक संगठन है, जो विश्व मंगल, विश्व शांति और वसुधैव कुटुंबकम की भावना को आधार बनाकर महायज्ञ जैसे प्रयास कर रहा है।

मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने गीता को मानवता का अब तक का सबसे महत्वपूर्ण संविधान बताते हुए कहा कि गीता का धर्म—वैदिक धर्म—सभी प्राणियों के मंगल का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि कर्मयोग, समत्व योग और निष्काम कर्म जैसे सिद्धांत आधुनिक दुनिया की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करते हैं और व्यक्ति को तनाव, संघर्ष और स्वार्थ से दूर शांतिपूर्ण जीवन की ओर ले जाते हैं।

डॉ. मिश्र ने घोषणा की कि आगामी गीता जयंती 2027 तक मातृभूमि सेवा मिशन के तत्वावधान में ज्योतिसर में प्रतिदिन प्रातः गीता ज्ञान यज्ञ आयोजित होगा, जिसमें प्रतिदिन गीता के एक अध्याय की आहुति दी जाएगी। यह संकल्प विश्व मंगल और विश्व शांति के लिए समर्पित है।

पूर्णाहुति अनुष्ठान का संचालन कुरुक्षेत्र संस्कृत वेद विद्यालय के आचार्य नरेश कौशिक ने वैदिक ब्रह्मचारियों के साथ किया। ब्रह्मचारियों ने सस्वर गीता श्लोकों का उच्चारण कर यज्ञ में आहुतियां समर्पित कीं। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने ज्योतिसर से गीता का वैश्विक पाठ किया।

कार्यक्रम में मिशन द्वारा मुख्यमंत्री, स्वामी ज्ञानानंद और सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह व अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही गीता जन्मस्थली की नित्य स्वच्छता में लगे कर्मचारियों को स्वच्छता प्रहरी सम्मान से भी सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर देश-विदेश से आए गीता पाठी, गीता भक्त, विद्वान, सामाजिक-धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ हुआ।

Advertisement

Poll

क्या आप \"Insight News24\" की खबरों से संतुष्ट हैं?

Cricket Live

Leave a Comment

इस पोस्ट से जुड़े हुए हैशटैग्स