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गीता में वर्णित मानव जीवन दर्शन दुनिया का सर्वश्रेष्ठ जीवन दर्शन : डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र

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कुरुक्षेत्र, 27 नवंबर। अंतरराष्ट्रीय श्रीमद्भगवद्गीता जयंती समारोह-2025 के उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा आयोजित अठारह दिवसीय कार्यक्रम के चौदहवें दिवस पर “श्रीमद्भगवद्गीता में भारतीय जीवन दर्शन” विषय पर गीता जीवन संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ की।

मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने संवाद को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय जीवन दर्शन का आधार स्तंभ है, जो मनुष्य को कर्म, ज्ञान और भक्ति के माध्यम से जीवन को श्रेष्ठ बनाने की सीख देती है। उन्होंने कहा कि गीता मनुष्य को स्वधर्म पालन, निःस्वार्थ कर्म और इच्छाओं के त्याग के माध्यम से सच्ची शांति का मार्ग दिखाती है।

डॉ. मिश्र ने कहा, “श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित मानव जीवन दर्शन दुनिया का सर्वश्रेष्ठ जीवन दर्शन है। गीता के अनुसार, कर्म करते समय फल के प्रति आसक्ति न रखना ही जीवन में शांति और स्थिरता का मार्ग है।”

कार्यक्रम के अतिविशिष्ट अतिथि कैप्टन चंद्रवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि गीता भारतीय धर्म, दर्शनशास्त्र और अध्यात्म का ऐसा आधार ग्रंथ है, जिसने मानव जाति को आत्मा की अमरता और कर्मशील जीवन का प्रेरणादायी संदेश दिया है।

अमेरिका से आए संदीप सिंह, श्रीमती गरिमा सिंह तथा दुबई से आए गन्धर्व सिंह चौहान एवं श्रीमती नेहा सिंह चौहान ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और मातृभूमि सेवा मिशन के सामाजिक प्रयासों की सराहना की।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. तारा चंद शर्मा ने किया जबकि आभार ज्ञापन एडवोकेट अमित भारद्वाज ने किया।

अतिथियों का स्वागत मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने तिलक, पुष्पवर्षा और शंखध्वनि के साथ किया। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ हुआ।

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