गांधीनगर, गुजरात: इंदौर के बाद गुजरात की राजधानी गांधीनगर में भी दूषित पानी की वजह से गंभीर हालात बन गए हैं। पिछले तीन दिनों में 104 बच्चे और 150 से अधिक लोग बीमार हो गए हैं। स्थानीय अस्पतालों ने बताया कि इन मामलों में लगभग आधे मरीजों को टाइफाइड की पुष्टि हुई है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि सिविल अस्पताल में बच्चों के लिए नया वार्ड खोलना पड़ा।
दूषित पानी की वजह
शहर के सेक्टर-24, 28 और आदिवाड़ा इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। जांच में सामने आया कि पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवेज का रिसाव हो रहा था। स्मार्ट सिटी योजना के तहत करोड़ों की लागत से बिछाई गई नई पाइपलाइन में 10 स्थानों पर लीकेज पाए गए।
प्रशासन ने की कार्रवाई
स्थिति गंभीर होने पर प्रशासन ने 75 स्वास्थ्य टीमें तैनात की हैं, जिन्होंने अब तक करीब 90,000 लोगों की स्वास्थ्य जांच की है। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी मामले का संज्ञान लिया।
उपमुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टर, नगर आयुक्त और स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक की और सिविल अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने बताया कि 22 डॉक्टरों की विशेष टीम बनाई गई है। गृह मंत्री अमित शाह ने कलेक्टर से फोन पर बात कर युद्ध स्तर पर कार्रवाई के निर्देश दिए।
पाइपलाइन की मरम्मत और पानी में क्लोरीन मिलाने का काम शुरू कर दिया गया है। स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए महिला स्वास्थ्यकर्मियों और आशा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर 40 टीमों में 80 से ज्यादा कर्मचारी तैनात किए गए हैं।
अस्पतालों में हालात
सिविल अस्पताल की अधीक्षक डॉ. मिताबेन पारिख ने बताया कि वर्तमान में 104 बच्चे भर्ती हैं। पिछले तीन दिनों में बच्चों की संख्या में 50% की बढ़ोतरी हुई है। प्रभावित अधिकांश बच्चे 16 वर्ष तक के हैं।
डॉ. पारिख ने कहा कि बच्चों में तेज बुखार, उल्टी और पेट दर्द की शिकायतें हैं। उनका इलाज IV फ्लूइड और एंटीबायोटिक्स से किया जा रहा है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नया वार्ड नंबर 604 खोलना पड़ा।
इंदौर की तरह गांधीनगर भी प्रभावित
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण अब तक 6 मौतें हो चुकी हैं और 150 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई और तुरंत पानी के टैंकर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।




