इंसाइट न्यूज 24, कुरुक्षेत्र, 3 सितम्बर : श्री गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति द्वारा आयोजित सप्त दिवसीय गणेश उत्सव में संस्थापक अध्यक्ष कथावाचक अनिल शास्त्री ने भगवान गणेश जी के रूप और उनके जीवन संदेशों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गणपति को प्रथम पूज्य स्थान इसलिए मिला क्योंकि उन्होंने अपने माता-पिता को सर्वोच्च सम्मान दिया—पृथ्वी की परिक्रमा के स्थान पर माता-पिता की परिक्रमा कर यह संदेश दिया कि “माता-पिता ही सम्पूर्ण संसार हैं।”
शास्त्री जी ने गणेश जी के प्रतीकों का भी गूढ़ अर्थ बताया:
• बड़े कान: सुनो सबकी, पर निंदा से प्रभावित मत हो।
• छोटी आंखें: संसार की ओर नहीं, ईश्वर की ओर दृष्टि रखो।
• बड़ा पेट: दुनिया की बातें अपने भीतर रखो, सबके सामने प्रकट न करो।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि गणपति की कृपा पाने के लिए जप, सिमरन और भक्ति को जीवन का हिस्सा बनाएं। “जब आप उन्हें अपने घर में स्थापित करते हैं, तो वह केवल मूर्ति नहीं, मंगलमूर्ति बन जाते हैं,” उन्होंने कहा।
कार्यक्रम के दौरान बाल कलाकार बालकृष्ण शर्मा ने गणेश जी का गुणगान प्रस्तुत किया, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया। आरती में शामिल हुए श्रद्धालुओं में आचार्य रंगनाथ शास्त्री, मोहन लाल मुंजाल, डॉ. जिज्ञास शर्मा, वीरेंद्र खुराना, नीति अरोड़ा, अंकुश अरोड़ा, रेणु गुप्ता सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में शास्त्री जी ने बाढ़ पीड़ितों के लिए विशेष प्रार्थना की और मंगलमूर्ति से देश में आई जल आपदा को शीघ्र दूर करने की कामना की।




