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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में पार्ट-टाइम शिक्षकों की दिवाली बेरंग, वेतन से फिर वंचित

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वर्कलोड असेसमेंट में देरी से अटकी सैलरी, शिक्षकों ने उठाई समान वेतन की माँग

कुरुक्षेत्र: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पार्ट-टाइम शिक्षक इस बार भी दिवाली बिना वेतन के मनाने को मजबूर हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जुलाई में शुरू किया गया वर्कलोड असेसमेंट अभी तक पूरा नहीं हो सका है, जिसके कारण शिक्षकों की सैलरी समय पर जारी नहीं हो पाई

पार्ट-टाइम शिक्षकों का कहना है कि वे रेगुलर शिक्षकों जितना ही कार्य करते हैं, लेकिन हर बार प्रशासन उनके योगदान को नजरअंदाज कर देता है। एक ओर जहाँ स्थायी शिक्षक वेतन पाकर परिवार संग त्योहार मना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पार्ट-टाइम टीचर्स आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं।


वर्कलोड फाइलों में देरी बनी मुख्य वजह

शिक्षकों ने बताया कि कई विभागों ने वर्कलोड फाइलें देरी से डीन अकादमिक ऑफिस को भेजीं, जबकि कुछ विभागों की फाइलें अब तक अप्रूव नहीं हुईं। इससे पहले भी कई बार वर्कलोड असेसमेंट में देरी के कारण वेतन भुगतान प्रभावित होता रहा है।


मानदेय में भी बड़ा अंतर

गौरतलब है कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में पार्ट-टाइम शिक्षकों को ₹34,000 प्रतिमाह या ₹750 प्रति लेक्चर मानदेय दिया जाता है, जबकि हरियाणा के अन्य विश्वविद्यालयों में यह राशि ₹50,000 (₹1500 प्रति लेक्चर) तक है।
इस अंतर के कारण कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को राज्य का सबसे कम मानदेय देने वाला संस्थान माना जा रहा है।

एक शिक्षक ने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा —

“हम विश्वविद्यालय के विकास में रेगुलर टीचर्स जितना ही योगदान देते हैं, लेकिन हर बार हमें भुला दिया जाता है।”


शिक्षकों की माँगें

पार्ट-टाइम शिक्षकों ने प्रशासन से अपील की है कि वेतन प्रक्रिया को समयबद्ध किया जाए और वर्कलोड फाइलें सेशन शुरू होने से पहले तैयार कर ली जाएँ। साथ ही उन्होंने ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ का सिद्धांत लागू करने की माँग की है ताकि शिक्षकों का सम्मान और आत्मविश्वास बना रहे।


🟫 मुख्य माँगें संक्षेप में

  • सेशन शुरू होने से पहले वर्कलोड फाइल तैयार की जाए।

  • वेतन भुगतान की प्रक्रिया समयबद्ध बनाई जाए।

  • समान कार्य के लिए समान वेतन लागू किया जाए।

  • पार्ट-टाइम शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय और स्थिरता दी जाए।

  • त्योहारों से पहले वेतन सुनिश्चित किया जाए।

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