14 नवम्बर 2025, कुरुक्षेत्र
अंतर्राष्ट्रीय श्रीमदभगवदगीता जयंती समारोह-2025 के उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा आयोजित अठारह दिवसीय विश्व मंगल महायज्ञ का शुभारम्भ शुक्रवार को गीता जन्मस्थली ज्योतिसर में धूमधाम से किया गया। समारोह की शुरुआत ज्योतिसर तीर्थ पूजन, गीता ग्रंथ पूजन और शंखनाद के साथ हुई। वैदिक ब्रह्मचारियों ने आचार्य नरेश कौशिक के मार्गदर्शन में सस्वर गीता श्लोकों का उच्चारण करते हुए लोकमंगल के लिए आहुतियां अर्पित कीं।
कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि “श्रीमदभगवदगीता निष्काम कर्म, योग, सदाचार और आत्मज्ञान का अद्भुत संगम है, जो व्यक्ति को नैतिक, शांत और सफल जीवन जीने की प्रेरणा देती है।” उन्होंने कहा कि गीता का संदेश मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में धैर्य, सुख-दुःख में समभाव और सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करता है।
डा. मिश्र ने आगे कहा कि गीता में वर्णित कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग जैसे मार्ग मानव जीवन को संतुलित और सार्थक बनाते हैं। गीता न केवल व्यक्तिगत उत्थान का मार्ग दिखाती है, बल्कि संपूर्ण मानव जाति के कल्याण का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि गीता आत्मा की अमरता, संसार की क्षणभंगुरता और जीवन के सत्य को समझाने में अद्वितीय ग्रंथ है।
शुभारम्भ अवसर पर ज्योतिसर की निवासी श्रीमती सरोज गोलन मुख्य यज्ञमान रहीं।
विश्व मंगल महायज्ञ में गुरु हरकिशन पब्लिक स्कूल संगरूर (पंजाब) के शिक्षक व विद्यार्थी भी शामिल हुए और आहुति प्रदान की।
कार्यक्रम में मातृभूमि शिक्षा मंदिर, कुरुक्षेत्र संस्कृत वेद विद्यालय के आचार्य व विद्यार्थी सहित विभिन्न राज्यों से आए गीता श्रद्धालु, गीता प्रेमी और विद्वान उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ के साथ किया गया।




