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कुरुक्षेत्र में राज्य स्तरीय आयुर्वेद संवाद: कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान बोले—“शास्त्र और रोगी ही वैद्य के सबसे बड़े गुरु”

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कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में बुधवार को आयुष विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय आयुर्वेद संवाद (CME) कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने शिरकत की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि “शास्त्र और रोगी—दोनों ही एक वैद्य के सबसे बड़े गुरु होते हैं। शास्त्रों का प्रत्येक शब्द अनुभूति से उपजा है और पूर्णत: सार्थक है।”

उन्होंने कहा कि एक योग्य वैद्य वही है, जो बिना अधिक दवाओं के आहार-विहार, दिनचर्या और सही परामर्श के जरिए रोगी को स्वस्थ कर सके। आज दुनिया में बड़ी संख्या में लोग केवल जीवनशैली सुधार अपनाकर रोगमुक्त जीवन जी रहे हैं।

आयुर्वेद सिर्फ डिग्री नहीं, जीवन शैली है: कुलपति

प्रो. धीमान ने नव-चयनित आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सामाजिक प्रतिष्ठा निरंतर परिश्रम से ही मिलती है। उन्होंने गीता के संदर्भ में कहा कि “कर्म ही परिश्रम है, और परिश्रम ही पुरुषार्थ है।”

उन्होंने आयुर्वेद को केवल एक शिक्षा नहीं, बल्कि जीवन में उतारने और समाज को स्वस्थ रखने वाली सतत प्रक्रिया बताया।
कोरोना काल में आयुर्वेद की प्रभावशीलता को पूरी दुनिया ने स्वीकार किया, इसलिए आयुर्वेद को वैश्विक स्वास्थ्य मॉडल बनाने की जिम्मेदारी आज भारत के वैद्यों पर है।

वैद्य जीवन के चार स्तंभ बताए—विद्या बल, चरित्र बल, नीति बल और धर्म बल

कुलपति ने कहा कि इन चारों का अर्जन अनुशासन, निरंतर अध्ययन और आत्ममंथन से संभव होता है।

विशेषज्ञों की उपस्थिति

कार्यक्रम में आयुष विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. चंदन दुआ, रिसोर्स पर्सन डॉ. दलीप मिश्रा, डॉ. गोपेश मंगल, श्री धन्वंतरि आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शंकर, एनसीआईएसएम नई दिल्ली से डॉ. अतुल वाषणे, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. मंजू, डॉ. मोहित गुप्ता सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।

अध्ययन और संवेदनशीलता को वैद्य का आधार बताया

आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता ने कहा कि एक वैद्य का व्यक्तित्व केवल ज्ञान नहीं, बल्कि आचरण, विनम्रता और रोगी के प्रति संवेदना से बनता है। उन्होंने नव-चयनित अधिकारियों से परंपरा और आधुनिकता का संतुलन अपनाकर आयुर्वेद को समाज तक पहुंचाने की अपील की।

कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारी

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो. रवि राज, प्रो. सीमा रानी, प्रो. विदुषी त्यागी, प्रो. कृष्ण कुमार, प्रो. शीलत सिंगला समेत अन्य शिक्षक एवं आयुष विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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