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कुरुक्षेत्र थप्पड़ कांड: चढूनी पर FIR, प्रशासन ने 10 दिन के लिए टाला फैसला

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कुरुक्षेत्र, 16 अक्टूबर : कुरुक्षेत्र में धान खरीद को लेकर हुए विवाद के दौरान भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) गुट के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी द्वारा DFSC अधिकारी को थप्पड़ मारने की घटना ने तूल पकड़ लिया है। प्रशासन ने फिलहाल 10 दिनों के लिए मामला टाल दिया है, लेकिन चढूनी पर गैर-जमानती धाराओं में FIR दर्ज कर दी गई है।

क्या है मामला?

मंगलवार को भाकियू चढूनी गुट ने धान में नमी कट और धीमी खरीद के विरोध में लघु सचिवालय पर धरना शुरू किया था। बुधवार को जब जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) राकेश आर्य किसानों से बातचीत करने पहुंचे, तो गुरनाम सिंह चढूनी ने उन्हें थप्पड़ मार दिया, जिससे माहौल गरमा गया।

हिरासत और थाने के बाहर प्रदर्शन

पुलिस ने तुरंत चढूनी समेत 30 से अधिक किसानों को हिरासत में लेकर झांसा थाने भेज दिया। इसके विरोध में किसान थाने के बाहर जुट गए। DFSC और खरीद एजेंसियों ने भी नाराजगी जताई। प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी।

FIR में लगीं ये धाराएं

DFSC की शिकायत पर सिटी थाना थानेसर में BNS की धारा 115, 121(1), 132, 221 और 351(2) के तहत FIR दर्ज की गई है। इनमें BNS 121(1) लोक सेवक को चोट पहुंचाने और BNS 132 कार्य में बाधा डालने से संबंधित हैं। दोनों ही गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आते हैं।

गिरफ्तारी नहीं, जमानत भी नहीं ली गई

भाकियू प्रवक्ता राकेश बैंस ने बताया कि गुरनाम सिंह चढूनी को गिरफ्तार नहीं किया गया, बल्कि हिरासत में लेकर पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। नए कानून के तहत 5–7 साल से कम सजा वाले मामलों में तत्काल गिरफ्तारी जरूरी नहीं होती।

25 अक्टूबर तक अल्टीमेटम

चढूनी ने सरकार को 25 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने DFSC राकेश आर्य को सस्पेंड करने, नया अधिकारी नियुक्त करने और RO हमेशा के लिए खोलने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि मांगे नहीं मानी गईं तो जाट धर्मशाला में राज्यस्तरीय बैठक कर बड़ा फैसला लिया जाएगा।

सरकार पर बढ़ा दबाव

सूत्रों का मानना है कि IPS पूरन कुमार और ASI संदीप कुमार सुसाइड केस के चलते सरकार पहले से ही दबाव में है। ऐसे में किसान आंदोलन को और भड़कने से रोकने के लिए प्रशासन ने फिलहाल मामला शांत करने की रणनीति अपनाई है।

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