इंसाइट न्यूज 24: केंद्र सरकार ने कपास पर लगने वाले आयात शुल्क में दी गई छूट की अवधि को आगे बढ़ा दिया है। अब यह छूट 31 दिसंबर 2025 तक लागू रहेगी। सरकार का कहना है कि इस कदम से वस्त्र और परिधान उद्योग को कच्चे माल की उपलब्धता सस्ती दरों पर हो सकेगी, जिससे निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।
लेकिन दूसरी ओर, किसानों का गुस्सा बढ़ गया है। उनका कहना है कि जब बाहर से सस्ते दाम पर कपास आयात होगी, तो घरेलू उत्पादन का मूल्य गिर जाएगा। इससे देश के कपास उत्पादक किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के बावजूद आर्थिक संकट में आ सकते हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने इस फैसले को “किसान विरोधी” बताया और केंद्र से तुरंत इसे वापस लेने की मांग की है। किसानों का मानना है कि यह नीति बड़ी कंपनियों और वस्त्र उद्योग के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका सीधा नुकसान छोटे और मध्यम स्तर के किसानों को होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार ने किसानों को उचित समर्थन नहीं दिया तो आने वाले सीजन में कपास की बुवाई पर असर पड़ सकता है और कृषि संकट और गहरा सकता है।




