विश्व ध्यान दिवस पर गीता ज्ञान संस्थानम् में सामूहिक ध्यान, आंतरिक शक्ति और वैश्विक सद्भाव का लिया संकल्प
कुरुक्षेत्र, 22 दिसंबर।
विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर गीता ज्ञान संस्थानम्, कुरुक्षेत्र के ध्यान कक्ष में परम पूज्य गीता मनीषी स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज के सानिध्य में भव्य सामूहिक ध्यान साधना का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्वामी जी ने उपस्थित साधकों को ध्यान का अभ्यास करवाते हुए आंतरिक शक्ति, सकारात्मक ऊर्जा और वैश्विक सद्भाव का संकल्प दिलाया।
इस ध्यान साधना सत्र की थीम ‘गीता संग जीने का ढंग बनाएं, ध्यान को जीवन का अंग बनाएं’ रखी गई। स्वामी जी ने कहा कि आज के तनावपूर्ण और भागदौड़ भरे जीवन में ध्यान ही ऐसा प्रभावी साधन है, जो मन, बुद्धि और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है।
अपने आशीर्वचनों में स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि इच्छाशक्ति को सशक्त करने के लिए विश्व में ध्यान का कोई विकल्प नहीं है। ध्यान केवल एक साधना नहीं, बल्कि स्वस्थ और सार्थक जीवन की कुंजी है। निरंतर अभ्यास से मन एकाग्र होता है और एकाग्र मन वाला व्यक्ति जीवन में निश्चित रूप से सफलता प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी नियमित रूप से ध्यान करते हैं, वे अध्ययन में भी अग्रणी रहते हैं।
स्वामी जी ने ध्यान के वैश्विक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस प्रकार यूनेस्को द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किए जाने के बाद योग विश्वभर में भारत की पहचान बना, उसी तरह ध्यान की उपयोगिता, महत्व और सत्व को समझते हुए 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस के रूप में निर्धारित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ध्यान केवल सही आसन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक और आत्मिक अनुशासन की प्रक्रिया है। पतंजलि योग दर्शन में योग के अष्टांगों में ध्यान को विशेष स्थान दिया गया है।
स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने गीता के छठे अध्याय का उल्लेख करते हुए कहा कि मन मित्र भी बन सकता है और शत्रु भी। यह अध्याय आत्म संयम योग के साथ-साथ ध्यान योग के रूप में भी जाना जाता है, जिसमें मन को नियंत्रित कर उसे अपने उत्थान का माध्यम बनाने का संदेश दिया गया है।
कार्यक्रम में हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि ध्यान हमें ‘मैं’ के भाव से अलग करता है और ईश्वर की प्राप्ति के लिए इस अहंकार का त्याग आवश्यक है। उन्होंने सभी से ध्यान को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा, श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. करतार सिंह, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रो. वी. रमन रेड्डी ने भी ध्यान की महिमा पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय पंजाबी महासभा के नेशनल प्रेसिडेंट एवं हरियाणा के पूर्व सूचना आयुक्त अशोक मेहता विशेष रूप से उपस्थित रहे।
ध्यान शिविर में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, गैर-शिक्षण स्टाफ, विद्यार्थी, व्यापारी वर्ग, महिलाएं और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।




