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इंदौर में दूषित पानी से हाहाकार, हाईकोर्ट ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई

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स्वच्छ शहर की छवि पर लगा बड़ा सवाल

देश के सबसे स्वच्छ शहरों में गिने जाने वाले इंदौर में पेयजल दूषित होने से गंभीर हालात पैदा हो गए हैं। शहर के कुछ इलाकों में नलों से गंदा पानी आने की शिकायतों के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ गए, जिससे नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

दूषित पानी से बीमार पड़े सैकड़ों लोग

पेयजल दूषित होने के कारण उल्टी, दस्त और पेट से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से सामने आए। कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जबकि कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे जलजनित बीमारी का मामला माना है।

हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर बताते हुए लगाई फटकार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि नागरिकों को साफ पानी उपलब्ध कराना प्रशासन की मूल जिम्मेदारी है और इस तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।

पेयजल लाइन में गड़बड़ी को माना जा रहा मुख्य कारण

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पेयजल पाइपलाइन में सीवेज या गंदा पानी मिल गया, जिससे पानी दूषित हुआ। पाइपलाइन लीकेज और अव्यवस्थित निर्माण कार्य को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।

नगर निगम और प्रशासन पर गिरी गाज

मामले के तूल पकड़ने के बाद नगर निगम के कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने माना है कि निगरानी में चूक हुई, जिसके चलते यह संकट गहराया। जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच जारी है।

इलाके के लोग डरे, नल के पानी से बना रहे दूरी

प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग नलों का पानी पीने से डर रहे हैं। कई परिवारों ने बोतलबंद पानी या अन्य वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि जब तक पानी की गुणवत्ता की पूरी जांच नहीं होती, तब तक भरोसा लौटना मुश्किल है।

स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, जांच और सैंपलिंग तेज

स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों को तैनात किया है। पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं और लोगों को उबालकर पानी पीने की सलाह दी जा रही है, ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके।

भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के निर्देश

हाईकोर्ट और प्रशासन दोनों ने निर्देश दिए हैं कि पेयजल व्यवस्था की नियमित जांच की जाए और पाइपलाइन नेटवर्क को दुरुस्त किया जाए। अधिकारियों को चेताया गया है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई गई तो कड़ी कार्रवाई होगी।

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