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अरावली पर केंद्र सरकार देश से माफी मांगकर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करे – दीपेन्द्र हुड्डा

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गुरुग्राम, 26 दिसंबर।

 गुरुग्राम में पत्रकार वार्ता, सरकार की नीयत पर सवाल

कांग्रेस सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने गुरुग्राम स्थित जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में अरावली पर्वत श्रृंखला से जुड़े मुद्दे पर केंद्र सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने गलत नीयत से पैरवी करते हुए अरावली के लिए 100 मीटर की परिभाषा को मंजूरी दिलवाई, जिसे देश की जनता स्वीकार नहीं कर रही है।

 जनता ने अरावली बेचने की मंशा पकड़ ली

दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि जनता ने अरावली को बेचने की सरकार की नीयत और “चोरी” दोनों को पकड़ लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पर्यावरण को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाने की कोशिश कर रही है, जिसे कांग्रेस और देश की जनता मिलकर कभी सफल नहीं होने देंगी।

100 मीटर की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति

सांसद ने बताया कि न सिर्फ जनता बल्कि सुप्रीम कोर्ट की एम्पावर्ड कमेटी भी 100 मीटर के पैमाने को अव्यावहारिक बता चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह की परिभाषा को खारिज कर दिया था।

 रिव्यू पिटीशन दाखिल करे सरकार

दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग की कि केंद्र सरकार इस निर्णय को निरस्त कराने के लिए स्वयं सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करे और देश की जनता से माफी मांगे। उन्होंने कहा कि अरावली को लावारिस नहीं छोड़ा जाएगा और हरियाणा व राजस्थान की जनता मिलकर पर्यावरण बचाने की लड़ाई लड़ेगी।

किसान आंदोलन जैसा दबाव बनेगा

उन्होंने कहा कि जैसे किसान आंदोलन में सरकार को अपने कदम पीछे हटाने पड़े थे, वैसे ही अरावली मुद्दे पर भी सरकार को जनता के दबाव में झुकना पड़ेगा। पर्वत और पर्यावरण को भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा।

 सरकार का हलफनामा सार्वजनिक करने की मांग

दीपेन्द्र हुड्डा ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र व राज्य सरकारों के रुख को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और मांग की कि हरियाणा सरकार अरावली मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया अपना हलफनामा सार्वजनिक करे।

 नई गाइडलाइन सिर्फ छलावा

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन केवल जनता को गुमराह करने का प्रयास है। नए माइनिंग पट्टे न देने की बात करना महज पहले से मौजूद सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का औपचारिक पालन भर है।

 जंगल खत्म करने वाले जंगल सफारी की बात कर रहे

दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि जो लोग जंगलों को खत्म करने की मंशा रखते हैं, वही अब जंगल सफारी की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब हरियाणा-दिल्ली एनसीआर दुनिया के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में शामिल है, तब अरावली को कमजोर करने वाला फैसला बेहद खतरनाक है।

हरियाणा में सिर्फ 2 प्रतिशत फॉरेस्ट कवर

उन्होंने कहा कि सरकार को अरावली में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण का संकल्प लेना चाहिए था। आज हरियाणा में मात्र 2 प्रतिशत फॉरेस्ट कवर है, जबकि जापान में 80 प्रतिशत और अमेरिका में लगभग 60 प्रतिशत फॉरेस्ट कवर मौजूद है।

 अवैध खनन से हजारों करोड़ का नुकसान

सांसद ने आरोप लगाया कि अरावली क्षेत्र में फार्म हाउस काटे जा रहे हैं और बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। उन्होंने सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि हरियाणा में अवैध खनन से करीब 5000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है।

 बिल्डर और माइनिंग लॉबी से मिलीभगत का आरोप

दीपेन्द्र हुड्डा ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें बिल्डर, माइनिंग और इंडस्ट्रियल लॉबी के दबाव में आकर 100 मीटर की परिभाषा गढ़ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट में लिया गया नया स्टैंड इसी गलत पैरवी का परिणाम है।

 संसद और विधानसभा में चर्चा से इनकार

उन्होंने कहा कि संसद के शीतकालीन सत्र और हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस ने पर्यावरण व अरावली मुद्दे पर चर्चा के लिए नोटिस दिया, लेकिन सरकार ने चर्चा कराने से इनकार कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इन मुद्दों पर चर्चा यहां नहीं होगी, तो क्या विदेशों की संसदों में होगी।

 कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद

इस अवसर पर विधायक आफताब अहमद, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जितेंद्र भारद्वाज, पूर्व मंत्री सुखबीर कटारिया, गुड़गांव शहर कांग्रेस अध्यक्ष पंकज डावर, ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष वर्धन यादव सहित अनेक वरिष्ठ कांग्रेस नेता उपस्थित रहे।

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