इंसाइट न्यूज 24, हरियाणा : हरियाणा के गुरुग्राम और फरीदाबाद जिलों में फैले अरावली क्षेत्र को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, प्रदेश सरकार की नई वन परिभाषा (Forest Definition) में अरावली की लगभग 14 हज़ार एकड़ ज़मीन को कानूनी संरक्षण से बाहर रखा जा सकता है।
विशेषज्ञों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि यह भूमि संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाती है तो यहाँ अवैध खनन, अतिक्रमण और अनियोजित निर्माण कार्य तेज़ी से बढ़ सकते हैं। अरावली पहले से ही लगातार कटान और शहरी विस्तार के दबाव में है। ऐसे में यह फैसला क्षेत्र की जैव विविधता और भू-जल स्तर दोनों पर गहरा असर डाल सकता है।
राज्य सरकार का तर्क है कि नई परिभाषा स्पष्टता लाएगी और भूमि उपयोग से जुड़ी कानूनी पेचिदगियों को कम करेगी। वहीं, पर्यावरणविद इसे “भविष्य की पीढ़ियों के लिए खतरा” बता रहे हैं। उनका कहना है कि अरावली न केवल हरियाणा बल्कि पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लिए फेफड़ों की तरह है, जो वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और भू-जल recharge में अहम भूमिका निभाती है।
इस विषय पर अदालत और केंद्र सरकार की नीतियों पर भी निगाहें टिकी हैं। यदि अरावली की सुरक्षा कमजोर हुई तो यह दिल्ली-एनसीआर में पर्यावरणीय संकट को और गहरा सकती है।




