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अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2025: शिल्प, संस्कृति और अध्यात्म की अनोखी छटा विश्वभर में बिखेरी

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कुरुक्षेत्र, 5 दिसंबर।
ब्रह्मसरोवर के पावन तटों पर 15 नवंबर से 5 दिसंबर तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2025 ने इस वर्ष विश्व के कोने-कोने तक अपनी गूंज पहुंचाई। अद्भुत शिल्पकला, विविध लोक संस्कृति और आध्यात्मिक वातावरण ने महोत्सव को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दिलाई। लाखों पर्यटक और श्रद्धालु इस यादगार आयोजन के साक्षी बने और इसकी अनूठी छटा अपने कैमरों में कैद करते नजर आए।

शिल्पकला और लोक संस्कृति ने खींचा ध्यान

महोत्सव में आए देश-प्रदेश के शिल्पकारों की अद्भुत और आश्चर्यचकित करने वाली कलाकृतियों ने आगंतुकों को मंत्रमुग्ध किया। विभिन्न राज्यों की वेशभूषा और लोक परंपराओं ने फिजा में रंग भर दिए। लोगों ने सरकार व प्रशासन की इस भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति की सराहना की।
उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केंद्र पटियाला द्वारा आमंत्रित कई पुरस्कार विजेता शिल्पकारों की मौजूदगी ने मेले को और आकर्षक बनाया। सरस और शिल्प मेले में शिल्पकारों ने अच्छा व्यवसाय किया, जिससे महोत्सव आर्थिक दृष्टि से भी सफल रहा।

पर्यटकों की भारी भीड़, हर दिन उत्साह चरम पर

मेला परिसर में प्रतिदिन भारी संख्या में पर्यटक पहुंचे। हरियाणा ही नहीं, देशभर से लोग कुरुक्षेत्र पहुंचे और शिल्प कला एवं लोक संस्कृति की अनूठी प्रस्तुति को अपने जीवन की सुहानी यादों में शामिल किया।


बॉक्स 1: लोक संस्कृति और वेशभूषा ने जीता दिल

विभिन्न प्रदेशों की लोक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पर्यटकों का मन मोह लिया। युवा, बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी ने इस बहुरंगी सांस्कृतिक संसार का भरपूर आनंद लिया और अपनी यादें अपने-अपने प्रदेशों तक ले गए।

बॉक्स 2: हरियाणवी स्वाद के साथ विभिन्न राज्यों के व्यंजनों की धूम

महोत्सव में पर्यटकों ने हरियाणवी खाद्य पदार्थों के साथ-साथ पंजाब और राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों के स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठाया। भोजन स्टॉलों पर दिनभर चहल-पहल रही।

बॉक्स 3: संध्या आरती और रंगीन रोशनी ने बढ़ाई भव्यता

ब्रह्मसरोवर पर संध्या कालीन महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। रात में रंग-बिरंगी रोशनी से सजे तटों ने माहौल को और भी मनमोहक बना दिया। महाआरती ने गीता के उपदेश—जीवन, उद्देश्य और आत्मबोध—को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया।

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