ब्रह्मसरोवर की फिजा में घुली शिल्पकला और लोक संस्कृति, पर्यटकों की उमड़ी भीड़
कुरुक्षेत्र, 29 नवंबर। ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर 15 नवंबर से 5 दिसंबर 2025 तक चल रहे अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव ने विश्व पटल पर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराई है। महोत्सव की गूंज न केवल देश और प्रदेश में, बल्कि विदेशों तक पहुंच रही है। आयोजन के 15वें दिन भी बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचकर सांस्कृतिक गतिविधियों और शिल्पकला का आनंद उठा रहे हैं।
शनिवार को महोत्सव स्थल पर विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों ने अपनी अनोखी और पारंपरिक शिल्पकला का प्रदर्शन किया, जिसे देखकर पर्यटक मंत्रमुग्ध हो उठे। हस्तनिर्मित वस्तुओं की खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा परिसर कला और संस्कृति के रंगों में रंग गया।
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने बताया कि हरियाणा सरकार और जिला प्रशासन के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकार अपनी सांस्कृतिक लोकधुनों और पारंपरिक नृत्य-कलाओं से पर्यटकों को आनंदित कर रहे हैं। ढोल की ताल और बीन की मधुर धुनों पर पर्यटक झूमते दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव देश की विलुप्त होती सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।
महोत्सव में आए पर्यटक अपने कैमरों में हर यादगार पल को कैद करते नजर आए। कला, संस्कृति और अध्यात्म का संगम बना यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन लगातार पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।




