कुरुक्षेत्र, 10 अक्टूबर : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में शुक्रवार को ‘बाबा बंदा सिंह बहादुर जी की भारतीय इतिहास को देन’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन इतिहास विभाग एवं पंजाबी विभाग की बाबा बंदा सिंह बहादुर चेयर के तत्वावधान में हुआ, जिसमें कई संस्थाओं ने सहयोग किया।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा, “बाबा बंदा सिंह बहादुर का जीवन भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका साहस, त्याग और न्यायप्रिय नेतृत्व आज भी प्रासंगिक है।” उन्होंने उन्हें एक दूरदर्शी समाज सुधारक और प्रशासक बताया।
मुख्य अतिथि बाबा जतिंदर पाल सिंह सोढी (दसवें वंशज, डेरा बाबा बंदा बहादुर, रियासी) ने चेयर को ₹10 लाख का अनुदान देने की घोषणा की। उन्होंने कहा, “बाबा बंदा सिंह बहादुर भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूतों में से एक थे, न कि केवल सिख इतिहास तक सीमित।”
मुख्य वक्ता प्रो. अमरजीत सिंह (देशभगत विश्वविद्यालय) ने बताया कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने किसानों और वंचितों को आत्मसम्मान और स्वराज्य दिलाने के लिए संघर्ष किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने उनकी गाथा को भारतीय इतिहास की अमर धरोहर बताया।
कार्यक्रम में डॉ. शिव शंकर सिंह पाहवा, स. हरपाल सिंह गिल, स. लखविंदर पाल सिंह ग्रेवाल सहित कई गणमान्य वक्ताओं ने विचार साझा किए। आयोजन में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की बड़ी भागीदारी रही।




