हरियाणा में नए पुलिस महानिदेशक के पद संभालते ही गुरुग्राम पुलिस व्यवस्था में व्यापक स्तर पर प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं। डीजीपी के दिशा-निर्देशों के बाद पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा ने एक साथ 22 थाना प्रभारियों (एसएचओ) के तबादले के आदेश जारी किए। इस सूची में कई अनुभवी इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। पुलिस विभाग का कहना है कि यह प्रक्रिया नियमित प्रशासनिक व्यवस्था के तहत की गई है।
इस तबादला सूची में गुरुग्राम के प्रमुख और वीआईपी इलाकों के थाने विशेष रूप से शामिल हैं। डीएलएफ, सुशांत लोक, पालम विहार और सेक्टर क्षेत्रों के थाना प्रभारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। आदेश जारी होते ही सभी तबादले तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए गए।
प्रशासनिक फेरबदल के तहत डीएलएफ फेज-1 थाने के प्रभारी राजेश कुमार को सेक्टर-40 भेजा गया है, जबकि सुशांत लोक थाने के प्रभारी मनोज कुमार को डीएलएफ फेज-1 की जिम्मेदारी दी गई है। सुशांत लोक थाने में अब पुलिस लाइन से अमन कुमार को नया एसएचओ नियुक्त किया गया है।
इसी क्रम में सेक्टर-65 थाने की कमान अजय वीर से हटाकर रामबीर को सौंपी गई है। डीएलएफ फेज-2 के प्रभारी मनोज को ट्रैफिक थाने में तैनात किया गया है, वहीं लाइन ऑफिसर जितेंद्र को डीएलएफ फेज-2 का नया एसएचओ बनाया गया है। जितेंद्र पहले फर्रुखनगर थाने में सेवाएं दे चुके हैं।
सेक्टर-53 थाने का प्रभार मानेसर से स्थानांतरित सतेंद्र को सौंपा गया है। इसके अलावा मानेसर, डीएलएफ फेज-2, सेक्टर-65 समेत करीब डेढ़ दर्जन थानों में तैनात एसएचओ का स्थानांतरण किया गया है। कई अधिकारियों को पुलिस लाइन या अन्य जिलों में भेजा गया है।
गुरुग्राम में बढ़ती आबादी, कॉरपोरेट गतिविधियां और साइबर सिटी के विस्तार के चलते अपराध के तरीकों में बदलाव देखा जा रहा है। साइबर अपराध, वाहन चोरी और संगठित गिरोहों की सक्रियता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने यह कदम उठाया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य शहर के पॉश इलाकों में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करना है। डीएलएफ, सुशांत लोक, पालम विहार और सेक्टर-56 जैसे क्षेत्रों में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए निगरानी और गश्त बढ़ाई जाएगी।
डीजीपी द्वारा जारी वर्ष 2026 की कार्ययोजना के तहत गुरुग्राम में क्राइम ब्रांच और एसटीएफ को और सक्रिय किया गया है। नए थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सीसीटीवी निगरानी, नियमित गश्त और आरडब्ल्यूए के साथ समन्वय को प्राथमिकता दें, ताकि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।




